कि एक बार संत श्रीज्ञानेश्वर महाराज और श्री नामदेवजी साथ भगवदचर्चा करते हुए यात्रा पर निकलते है । तो काफी देर तक चलने के बाद दोनों को बहुत तेज प्यास लगी |
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तो वही पास में एक सुख कुआं था तो संत ज्ञानेश्वर ने अपने योग विदया से कुएं के भीतर जमीन के अंदर जाकर पानी पिया और
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श्री नामदेव महाराज के लिए थोड़ा सा जल उनके लिए लेकर ऊपर आए | लेकिन श्री नामदेव महाराज ने उस जल को ग्रहण न किया |
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और बड़े ही मार्मिक शब्दों में कहाँ कि मैं इस जल ना क्यू पीयू | क्या मेरे विट्ठल को मेरी चिंता नहीं है कि उसका दास प्यासा है |
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श्री नामदेव महाराज के मुख से ये बात निकली ही थी कि देखते ही देखते वो सुखा कुआं उसी क्षण जल से भर गया | फिर नामदेव जी ने जल ग्रहण किया |
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