इक तरफ मां है मेरी,
इक तरफ ये संसार,
इक तरफ कष्ट हैं मेरे,
इक तरफ मां का प्यार,
इक तरफ लोभ,
इक तरफ भोग,
इक तरफ माया का भंडार,
इक तरफ माता जगत जननी मेरी,
मां दुर्गा का दरबार ।।
इक तरफ मां है मेरी,
इक तरफ ये संसार,
इक तरफ कष्ट हैं मेरे,
इक तरफ मां का प्यार,
इक तरफ मां है मेरी,
इक तरफ ये संसार,
इक तरफ कष्ट हैं मेरे,
इक तरफ मां का प्यार ।।
कैसे-कैसे ये दुष्टों से मां, पाला पड़ा,
कल तक था जो मेरा वो, मेरे सामने खड़ा,
कैसे-कैसे ये दुष्टों से मां, पाला पड़ा,
कल तक था जो मेरा वो, मेरे सामने खड़ा,
तेरे हवन की अग्नि में मां जलता रहूं,
कितना भी ये गिरा दें मां मैं चलता रहूं,
मेरी मैय्या के आसरे में चलता रहूं,
इक तरफ दौलत शोहरत, दौड़ता हर लाचार,
इक तरफ आरती है और मां का श्रृंगार,
इक तरफ मां है मेरी,
इक तरफ ये संसार,
इक तरफ कष्ट हैं मेरे,
इक तरफ मां का प्यार ।।
दुनियादारी के सारे बंधन तोडूंगा मैं,
मां वाघेश्वरी का दर ना छोडूंगा मैं,
तेरे मंदिर के सामने मां बैठा रहूं,
आते-जाते हुए हर प्राणी की सेवा करूं,
हर इक प्यासे पंथी को पानी देता रहूं,
इक तरफ पीड़ा शोषण भूख और निराहार,
उस तरफ सबकी सेवा जिस तरफ तेरा निखार ।।
इक तरफ मां है मेरी,
इक तरफ ये संसार,
इक तरफ कष्ट हैं मेरे,
इक तरफ मां का प्यार,
इक तरफ लोभ,
इक तरफ भोग,
इक तरफ माया का भंडार,
इक तरफ माता जगत जननी मेरी,
मां दुर्गा का दरबार,
इक तरफ मां है मेरी,
इक तरफ ये संसार,
इक तरफ कष्ट हैं मेरे,
इक तरफ मां का प्यार ।।
इक बेटा तेरा बोले मां एक बेटा बोल ना सकता,
एक के हाथों हथियार है मां एक निर्मल और निहत्ता,
एक बेटे ने जयकार किए एक बेटा बस चिल्लाया,
तेरे दर पर ही एक बेटे ने दूजे का शीश चढ़ाया,
जो रक्त लहू से लाल हो कैसा ममता का दर है,
जहां भक्ति भी बार-बार हो कट जाते कितने सर हैं,
मैया तेरा भक्त है कौन बड़ा कौन अपना कौन पराया,
जिसने सर क्षण में काट दिया या जिसने सर है कटाया,
तेरे खुले केश और रक्त नयन कर में खप्पर मुंडमाल भयंकर,
काल चरम पर ताल परम पर छील चरम सर कर दे कलम और
कालरात्रि काल करो श्मशानवासिनी नाश करो,
निर्मल का रक्त बहाये जो उनके ही रक्त का पान करो ।।
अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते,
गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते।
भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते,
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥