Bhajan Name – Mahavtar Narasimha Sampurn Katha Bhajan Lyrics ( महावतार नरसिंह सम्पूर्ण कथा भजन लिरिक्स(इसको जरुर देखे )
Bhajan Lyric- Manoj Muntashir Shukla
Bhajan Singer- Brijesh Shandilya, Suril Vispute
Music Label- T-Series
दोहा
|| ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् ||
|| नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युम् नमाम्यहम् ||
नर जो थर थराए पाप से धरा विकल होए गगन
तो अवतरित हो नाथ विष्णु चेर सिंधु त्याग के
पुकार ले गुहार ले जो भक्त पूरे भाव से
वो दौड़े आए छोड़ के बिछौने शेष नाग की
जो अंतरिक्ष की समस्त तारिकाएं गा रही
भागवत पुराण में लिखी है वो अमर कथा
हिरण्य कश्यप एक था असुर के जिसके त्रास से
ये सृष्टि ताही ताही ताही कर रही थी सर्वथा
दिया था वर जगत पिता ने उसको
ऐसी शक्ति का कि जो लड़ेगा
उसकी क्रूरता से हार जाएगा।
हां मनुष्य ना ही देवता ना जीव जंतु पशु कोई
समस्त विश्व में कोई ना उसको मार पाएगा।
कभी-कभी विचित्र खेल खेलता है यह समय
जो बुद्धि बल से आज तक कोई नहीं समझ सका
हुआ उसी के घर में एक धर्मनिष्ठ का जन्म वो
दैत्य राज जो प्रतीक था स्वयं अधर्म का
नरसिम्हा नरसिम्हा नरसिम्हानरसिम्हा नरसिम्हा नरसिम्हा
विष्णु जी को शत्रु मारता रहा असुर पिता
उनहीं सजा के पुत्र की सवासता ये जुड़ गई
हिरण्य कश्यप एक क्षण ये सोच के सहल गया
कि राक्षसों की रीतियां ये किस दिशा में मुड़ गई
प्रबल थी इतनी शत्रुता कि क्रूरता मचल उठी
कोमलता ह्रदय में जो, वो विष चढ़ा के सो गया
अदि पिता ने पुत्र को ही प्राणदंड दे दिया
हुआ न था जो कभी अनर्थ, वो भी हो गया
मगर अमर विपियों के घेरे में, जान लो, आसरा है
विष्णु का ही, सब सहारे छोड़के
“बचाओ नाथ, आओ नाथ राम-राम भक्त है
पुकारने लगा प्रह्लाद, दोनों हाथ जोड़ के
चौंधने लगी गगन में, विद्युलियों पे बिजलियाँ
कड़क उठे, गरज उठे.. करोड़ों मेघ एक साथ
निःशब्द, अवाक, हताश से खड़े रहे
सहस्त्र कोटि देवता ये दृश्य देख एक साथ
शेर की दहाड़ सुन चटक गईं शिला-शिला
दरक गए नक्षत्र भी, प्रचण्ड सिंह-नाद से
गटार के सवार, रख. असुर के वक्ष में
तो लाल-लाल हो गईं दिशाएं, रक्त-पात से
महान भक्त को मिला महावतार का दरस
समस्त प्रार्थनाएं फल गयी जो थीं नाथ से
अधर्म का घना अँधेरा, यूँ परास्त हो गया
विजय से रात्रि हार गयी, पराक्रमी प्रभात से
नरसिम्हा नरसिम्हा नरसिम्हानरसिम्हा नरसिम्हा नरसिम्हा